फ़्लैश मेमोरी के प्रमुख प्रकार :-
1. NAND फ़्लैश :-
- यह उच्च स्टोरेज घनत्व और कम लागत के लिए जाना जाता है।
- इसका उपयोग USB ड्राइव, SSD, और मेमोरी कार्ड में होता है।
- डेटा को ब्लॉक्स में पढ़ा/लिखा जाता है।
2. NOR फ़्लैश :-
यह रैंडम एक्सेस (Random
Access) के लिए बेहतर है, इसलिए इसे कोड
एक्ज़ीक्यूशन (जैसे फर्मवेयर) के लिए उपयोग किया जाता है।
v NAND की तुलना में महंगा और कम
स्टोरेज घनत्व वाला होता है।
कैसे काम करती है :-
- फ़्लोटिंगगेट ट्रांजिस्टर: फ़्लैश मेमोरी सेल में एक ट्रांजिस्टर होता है जिसके गेट पर इलेक्ट्रॉन्स को फँसाया जाता है। यह इलेक्ट्रॉन्स की उपस्थिति या अनुपस्थिति बाइनरी डेटा (0 या 1) को दर्शाती है।
- टनलिंग इफ़ेक्ट: डेटा लिखने या मिटाने के लिए हाई वोल्टेज का उपयोग करके इलेक्ट्रॉन्स को ऑक्साइड लेयर के माध्यम से "टनल" कराया जाता है।
- राइट/इरेस साइकल: प्रत्येक सेल एक सीमित संख्या में ही डेटा लिख/मिटा सकता है (आमतौर पर 10,000 से 1,00,000 बार)।
फ़्लैश मेमोरी के उपयोग :-
1. USB फ़्लैश ड्राइव: पोर्टेबल स्टोरेज के
लिए।
2. SSD (Solid State
Drive): हार्ड डिस्क की तुलना में तेज़ और टिकाऊ।
3. मेमोरी कार्ड: कैमरा, स्मार्टफोन, गेम कंसोल में।
4. एम्बेडेड सिस्टम: IoT डिवाइस, राउटर, सेंसर आदि में।
फायदे :-
- तेज़ एक्सेस: HDD की तुलना में डेटा ट्रांसफर स्पीड अधिक।
- बिना बिजली के डेटा सुरक्षित: नॉनवोलेटाइल होने के कारण।
- टिकाऊ: कोई मूविंग पार्ट नहीं, इसलिए झटके या गिरने से कम नुकसान।
- ऊर्जा कुशल: HDD की तुलना में कम बिजली खपत।
सीमाएँ :-
- सीमित राइट साइकल: अधिक उपयोग से सेल खराब हो सकते हैं।
- कीमत: HDD की तुलना में प्रति GB कीमत अधिक (हालांकि यह घट रही है)।
- वेयर लेवलिंग: लंबी उम्र के लिए SSD में डेटा को समान रूप से वितरित करने की आवश्यकता होती है।
भविष्य की दिशाएँ :-
- 3D NAND: सेल्स को लंबवत स्टैक करके स्टोरेज घनत्व बढ़ाना।
- QLC (QuadLevel Cell): एक सेल में 4 बिट्स स्टोर करना (उच्च क्षमता, पर कम टिकाऊ)।
- NVMe प्रोटोकॉल: SSD की स्पीड को पूरी तरह उपयोग करने के लिए।
नोट :-
फ़्लैश मेमोरी ने आधुनिक तकनीक में क्रांति ला
दी है, जिससे पोर्टेबल, टिकाऊ और हाईस्पीड
स्टोरेज संभव हुआ है।

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